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अगर छोटे बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ का समय पर डायपर न बदला जाठतो गीलेपन की वजह से उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ डायपर रैशेज की दिकà¥â€à¤•त हो जाती है। डिलीवरी के बाद बचà¥â€à¤šà¥‡ का पहला साल मां के लिठबहà¥à¤¤ चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ होता है, कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि यही वो समय होता है जब मां को बचà¥â€à¤šà¥‡ की जरूरतों को उसके बिना बोले ही समà¤à¤¨à¤¾ होता है।
इसी समय में मां को बचà¥â€à¤šà¥‡ के बिना बोले उसके à¤à¥‚ख लगने और डायपर बदलने का खà¥à¤¦ ही अंदाजा लगाना होता है। आपकी इस मà¥à¤¶à¥à¤•िल को कम करने के लिठआज हम आपको इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल के जरिठबताने जा रहे हैं कि उमà¥à¤° के हिसाब से बचà¥â€à¤šà¥‡ का डायपर कब और कितनी बार बदलना चाहिà¤à¥¤
नवजात शिशॠसे लेकर à¤à¤• महीने की उमà¥à¤°
नवजात शिशॠको बड़े बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में डायपर की जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जरूरत होती है। à¤à¤• महीने से छोटे शिशॠको à¤à¤• दिन में कम से कम 6 से 10 डायपर की जरूरत होती है। इस उमà¥à¤° में बचà¥â€à¤šà¥‡ लगà¤à¤— तीन से चार बार पॉटी और लगà¤à¤— हर घंटे में पेशाब करते हैं, इसलिठशà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ महीने में आपको डायपर की बहà¥à¤¤ जरूरत पड़ती है।
अगर आपका शिशॠà¤à¥€ निकालता है जीà¤, तो इन बातों पर जरूर करें गौर
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जब शिशॠबोलना नहीं सीखते हैं तो अपनी हरकतों से ही अपनी जरूरतों के बारे में बताते हैं। à¤à¥‚ख लगने पर à¤à¥€ शिशॠजीठनिकालकर अपनी मां को संकेत देते हैं। कई बार खाना खिलाते समय जब बचà¥â€à¤šà¥‡ का पेट à¤à¤° जाता है, तब à¤à¥€ वो जीठनिकालकर इस बारे में बताते हैं।
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अगर आपने अà¤à¥€ अपने बचà¥â€à¤šà¥‡ को कम ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥‚ किया है और खाना खाते समय बचà¥â€à¤šà¤¾ जीठनिकाल रहा है तो इसका मतलब है कि अà¤à¥€ आपका बचà¥â€à¤šà¤¾ ठोस आहार खाने के लिठतैयार नहीं है।
कई बार बचà¥â€à¤šà¥‡ मà¥à¤‚ह से सांस लेने की वजह से à¤à¥€ जीठनिकाल सकते हैं। खांसी, जà¥à¤•ाम, साइनस बंद होने, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€, टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤²à¥â€à¤¸ में सूजन जैसे कई कारणों से बचà¥â€à¤šà¤¾ मà¥à¤‚ह से सांस लेता है।
अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• गैस के कारण होने वाली बेचैनी और दरà¥à¤¦ के कारण कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‡ गैस पास करते समय अपनी जीठबाहर निकाल सकते हैं।
इसमें असामानà¥â€à¤¯ रूप से जीठका आकार बढ़ जाता है। कà¥à¤› बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में डाउन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® या बेâ€à¤•विथ विडेमैन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® के कारण जीठका साइज बढ़ सकता है। जीठबड़ी होने पर शिशॠको दिकà¥â€à¤•त होती है और वो बार-बार अपनी जीठबाहर निकालने लगता है।
शिशॠके जीठनिकालने को टंग थà¥à¤°à¤¸à¥â€à¤Ÿ कहा जाता है। जब बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ के दांत निकलते हैं, तब à¤à¥€ वो जीठनिकालते हैं। हालांकि, दांत निकालने का यही à¤à¤•मातà¥à¤° संकेत नहीं होता है। मसूड़ों में सूजन, मसूड़ों का लाल होना, मà¥à¤‚ह में बचà¥â€à¤šà¥‡ का चीजें डाल लेना और चिड़चिड़ा होना à¤à¥€ दांत आने का संकेत है।
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नवजात शिशॠदूध पीते समय अपनी जीठबाहर निकालते हैं और कई बार 4 से 6 महीने की उमà¥à¤° के बाद उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ जीठनिकालने की आदत पड़ जाती है। इसमें बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को मजा à¤à¥€ आता है।
कà¥à¤› बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में मसल टोन कम होता है और जीठà¤à¥€ à¤à¤• मांसपेशी है जिसे मà¥à¤‚ह की अनà¥â€à¤¯ मांसपेशियां नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करती हैं । मसल टोन की वजह से à¤à¥€ बचà¥â€à¤šà¥‡ सामानà¥â€à¤¯ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार मà¥à¤‚ह से जीठबाहर निकाल सकते हैं। डाउन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® और सेरेबà¥à¤°à¤² पालà¥â€à¤¸à¥€ जैसी कई सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के कारण मसल टोन में कमी आ सकती है।
इसके अलावा हिपोटोनिया, माइकà¥à¤°à¥‹à¤—नाथिया जैसी कई सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के कारण à¤à¥€ शिशॠजीठबाहर निकालने लगते हैं। अगर आपका बचà¥â€à¤šà¤¾ सामानà¥â€à¤¯ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार टंग थà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग कर रहा है या à¤à¤¸à¤¾ करने के दौरान वो चिड़चिड़ा हो जाता है और रोने à¤à¥€ लगता है तो तà¥à¤°à¤‚त पीडियाटà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ को दिखाà¤à¤‚।
à¤à¤• महीने से पांच महीने तक
à¤à¤• महीने के बचà¥â€à¤šà¥‡ को 4 से 6 डायपर की जरूरत पड़ती है। सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥â€à¤• लेने वाले बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ डायपर की जरूरत पड़ सकती है। बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• पचाने में आसान होता है और इसीलिठसà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले बचà¥â€à¤šà¥‡ जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पॉटी और पेशाब करते हैं।
पांच महीने से अधिक उमà¥à¤°
पांच महीने का होने पर शिशॠपहले की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में कम बार पॉटी करता है। फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥â€à¤• लेने वाले बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने वाले बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ का मल पतला होता है। इस उमà¥à¤° में शिशॠको दिन में आठडायपर की जरूरत à¤à¥€ पड़ सकती है।
अगर आपका शिशॠà¤à¥€ निकालता है जीà¤, तो इन बातों पर जरूर करें गौर
जब शिशॠबोलना नहीं सीखते हैं तो अपनी हरकतों से ही अपनी जरूरतों के बारे में बताते हैं। à¤à¥‚ख लगने पर à¤à¥€ शिशॠजीठनिकालकर अपनी मां को संकेत देते हैं। कई बार खाना खिलाते समय जब बचà¥â€à¤šà¥‡ का पेट à¤à¤° जाता है, तब à¤à¥€ वो जीठनिकालकर इस बारे में बताते हैं।
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अगर आपने अà¤à¥€ अपने बचà¥â€à¤šà¥‡ को कम ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥‚ किया है और खाना खाते समय बचà¥â€à¤šà¤¾ जीठनिकाल रहा है तो इसका मतलब है कि अà¤à¥€ आपका बचà¥â€à¤šà¤¾ ठोस आहार खाने के लिठतैयार नहीं है।
कई बार बचà¥â€à¤šà¥‡ मà¥à¤‚ह से सांस लेने की वजह से à¤à¥€ जीठनिकाल सकते हैं। खांसी, जà¥à¤•ाम, साइनस बंद होने, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€, टॉनà¥à¤¸à¤¿à¤²à¥â€à¤¸ में सूजन जैसे कई कारणों से बचà¥â€à¤šà¤¾ मà¥à¤‚ह से सांस लेता है।
अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• गैस के कारण होने वाली बेचैनी और दरà¥à¤¦ के कारण कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‡ गैस पास करते समय अपनी जीठबाहर निकाल सकते हैं।
इसमें असामानà¥â€à¤¯ रूप से जीठका आकार बढ़ जाता है। कà¥à¤› बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में डाउन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® या बेâ€à¤•विथ विडेमैन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® के कारण जीठका साइज बढ़ सकता है। जीठबड़ी होने पर शिशॠको दिकà¥â€à¤•त होती है और वो बार-बार अपनी जीठबाहर निकालने लगता है।
शिशॠके जीठनिकालने को टंग थà¥à¤°à¤¸à¥â€à¤Ÿ कहा जाता है। जब बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ के दांत निकलते हैं, तब à¤à¥€ वो जीठनिकालते हैं। हालांकि, दांत निकालने का यही à¤à¤•मातà¥à¤° संकेत नहीं होता है। मसूड़ों में सूजन, मसूड़ों का लाल होना, मà¥à¤‚ह में बचà¥â€à¤šà¥‡ का चीजें डाल लेना और चिड़चिड़ा होना à¤à¥€ दांत आने का संकेत है।
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नवजात शिशॠदूध पीते समय अपनी जीठबाहर निकालते हैं और कई बार 4 से 6 महीने की उमà¥à¤° के बाद उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ जीठनिकालने की आदत पड़ जाती है। इसमें बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को मजा à¤à¥€ आता है।
कà¥à¤› बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में मसल टोन कम होता है और जीठà¤à¥€ à¤à¤• मांसपेशी है जिसे मà¥à¤‚ह की अनà¥â€à¤¯ मांसपेशियां नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करती हैं । मसल टोन की वजह से à¤à¥€ बचà¥â€à¤šà¥‡ सामानà¥â€à¤¯ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार मà¥à¤‚ह से जीठबाहर निकाल सकते हैं। डाउन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® और सेरेबà¥à¤°à¤² पालà¥â€à¤¸à¥€ जैसी कई सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के कारण मसल टोन में कमी आ सकती है।
इसके अलावा हिपोटोनिया, माइकà¥à¤°à¥‹à¤—नाथिया जैसी कई सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के कारण à¤à¥€ शिशॠजीठबाहर निकालने लगते हैं। अगर आपका बचà¥â€à¤šà¤¾ सामानà¥â€à¤¯ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बार टंग थà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग कर रहा है या à¤à¤¸à¤¾ करने के दौरान वो चिड़चिड़ा हो जाता है और रोने à¤à¥€ लगता है तो तà¥à¤°à¤‚त पीडियाटà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ को दिखाà¤à¤‚।
à¤à¤• साल की उमà¥à¤° तक
9 महीने से 12 महीने तक के बचà¥â€à¤šà¥‡ को à¤à¥€ दिन में आठडायपर की जरूरत पड़ती है। इस हिसाब से इस उमà¥à¤° का शिशॠमहीने में 240 डायपर इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करता है।
उमà¥à¤° के हिसाब से शिशॠके लिठडायपर की औसत उपयोग की संखà¥â€à¤¯à¤¾ बताई गई है। हालांकि, सà¤à¥€ बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ में इसकी संखà¥â€à¤¯à¤¾ में थोड़ा बदलाव हो सकता है।
कब बदलना चाहिठडायपर
जब à¤à¥€ आपको लगे कि आपके बचà¥â€à¤šà¥‡ का डायपर गीला हो गया है तो तà¥à¤°à¤‚त उसे बदल दें। पेशाब या मल की वजह से शिशॠको इंफेकà¥â€à¤¶à¤¨ हो सकता है और इसका इलाज बचà¥â€à¤šà¥‡ को तकलीफ दे सकता है।
जब à¤à¥€ बचà¥â€à¤šà¤¾ सोकर उठता है तो उसका डायपर जरूर चेक करें। डायपर बदलने के लिठबचà¥â€à¤šà¥‡ को नींद से जगाने की जरूरत नहीं है। दूध पिलाने से पहले à¤à¥€ बचà¥â€à¤šà¥‡ का डायपर चेक करना चाहिà¤à¥¤ रात को सà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ से ठीक पहले डायपर जरूर बदलें।
नवजात शिशॠà¤à¤• से 3 घंटे के अंदर और दूध पीने के बाद पेशाब जरूर करता है। डायपर बदलने के लिठउसके जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गीले या à¤à¤¾à¤°à¥€ होने का इंतजार न करें। थोड़े-थोड़े समय में चेक करते रहें कि बचà¥â€à¤šà¥‡ का डायपर गीला है या नहीं और उसके रूटीन के हिसाब से डायपर बदलने के कà¥à¤› समय निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ कर लें।
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